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Saturday, Sep 21, 2024
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शैक्षणिक

रोते हुए किसान ने एडीएम से माँगी इच्छा मृत्यु ,कीटनाशक दवाई की बोतल लेकर पहुँचा जनसुवाई में

गिट्टी खदानों में हो रहे ब्लास्टिंग से किसान सारी फसलें हो गयी चौपट
2 वर्षों से समस्या लेकर जनसुवाई में पहुँच रहा किसान
बुरहानपुर- प्रशासन से शिकायत कर परेशान हुए किसान ने अपनी जमीन को सरकारी जमीन बनाने या फिर इच्छा मृत्यु देने की मांग की है। दो माह से किसान लगातार खदानों में हो रहे ब्लास्ट के कारण केला फसल को नुकसान और भूमिगत जलस्तर गिरने की शिकायत कर रहा है। लेकिन अफसर मौके पर जाकर खाना पूर्ति कर लौट आते है। इससे परेशान किसान कीटनाशक की बोतल लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा था।
ग्राम खडकोद में खदानों में हो रहे ब्लॉस्ट से आसपास के किसान परेशान है। धनराज चंदनकर के परिवार का साढ़े चार एकड़ का खेत तीनों खदानों से घिरा हुआ है। अभी 2 एकड़ में केला के पांच हजार पौधे लगे हैं, लेकिन इस पर चारों तरफ धूल जमी है। इस कारण उपज खराब हो रही है। लुंगर टूट कर गिर रहे हैं। ऐसी फसल लेने को व्यापारी तैयार नहीं हैं। संतोष ने छह से सात लाख रुपए खर्च कर हाल ही में खेत में 2 ट्यूबवेल खनन कराए। दोनों में भरपूर पानी निकला लेकिन खदानों में ब्लास्टिंग होते ही दोनों ट्यूबवेल के जलस्रोत बंद हो गए और ये पूरी तरह सूख गए। संतोष ने बताया पिछले चार-पांच साल में 12 लाख रुपए का नुकसान झेल चुके हैं। सेवा सहकारी समिति सहित बाहर से सात लाख रुपए का कर्ज लिया है। समस्या को लेकर संतोष 5 साल से लड़ाई लड़ रहे हैं। 2 साल से तो उनकी शिकायतों का सिलसिला थमा ही नहीं है। 2 माह से हर जनसुनवाई में पहुंच रहे हैं। मंगलवार को संतोष फिर शिकायत लेकर पहुंचा। इस बार अपर कलेक्टर शैलेंद्रसिंह सोलंकी वहां मौजूद थे। अपर कलेक्टर ने शिकायती पत्र देखा और खनिज विभाग को जांच के लिए कहा, इस पर संतोष ने कहा साहब कई बार यह लोग आकर जांच कर चुके है। पहले शिकायत करने पर किसान को झूठा ठहराया। ज्यादा शिकायत हुई, तो कहा थोड़ी मात्रा में धूल है। घर के जेवर बेच चुका हुं, सात लाख का कर्ज हो चुका है। सरकारी इस जमीन को खरीद ले या फिर मुझे इच्छामृत्यु की अनुमति दे दे, यही ठीक होगा। अपर कलेक्टर शैलेंद्रसिंह सोलंकी ने आश्वासन देते हुए मामले की पूरी जांच कराने की बात कहीं है।
खनिज विभाग ने नहीं की कार्रवाई
किसान धनराज ने बताया कि गिट्टी खदान इंदिरा कालोनी निवासी नरेंद्र महाजन व अमर चौकसे संचालित करते हैं। इसी के पास सलीम सेठ का डामर प्लांट भी है। गिट्टी बनाने व डामर से उड़ने वाली धूल के कारण भी केला फसल को नुकसान पहुंच रहा है। केले का अनुबंध करने में भी इसके कारण काफी कठिनाई होती है। इस संबंध में कई बार खनिज अधिकारी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की जा चुकी है, लेकिन उन्होंने कार्रवाई नहीं की। खनिज अधिकारी ने निरीक्षण के बाद यह तक कह दिया था कि ब्लास्टिंग से ट्यूबवेल को कोई फर्क नहीं पड़ता।

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