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Friday, Jun 14, 2024
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पर्यावरण/ प्रकृति बुरहानपुर जिला मध्यप्रदेश स्पेशल/ विशेष

भूजल संग्रहण कर भारत में बुरहानपुर जिले को सिरमौर बनाना है-अर्चना चिटनिस ,जल गंगा संवर्धन अभियान’ अंतर्गत आयोजित ’जल संस्कार-2024’ अंतर्गत ‘‘जल संवर्धन एवं भूमिगत जल पुनर्भरण‘‘ कार्यशाला संपन्न


बुरहानपुर। धरती मां जब तक पेड़ों का, हरियाली का आंचल ओढ़े रहेगी तब तक धरती पर पानी बना रहेगा। जल प्रबंधन ‘स्वयं का, स्वयं के लिए’ एक ऐसा कारगर प्रयास है, जिसे करने से लोग अकाल जैसी स्थितियों से सदा के लिए मुक्त हो सकते हैं। पीने के पानी और पशुओं के लिए चारे की समस्या का समाधान स्थायी रूप से हो सकता है। पानी जो जीवनदायक संसाधन है, वस्तुतः समुदाय की सम्पत्ति है। इसके लिए सामुदायिक प्रबंधन की आवश्यकता है। हम सब का यह नैतिक दायित्व है कि हम जल समृद्ध बुरहानपुर हेतु हमारी पीढ़ी को जल संस्कारों से अवगत कराए। यह समय की पुरजोर मांग है कि उपलब्ध पानी को अधिक से अधिक संचित, प्रबंधित और संरक्षित किया जाए, जिससे देशवासियों के आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य स्तर को ऊपर उठाया जा सके। इसलिए यह जरूरी है कि सरकार के दायरे से बाहर निकलकर सामुदायिक प्रयासों से जल को संरक्षित और संचित किया जाए। हमें भूजल संग्रहण कर भारत में बुरहानपुर को सिरमौर बनाना है।


उक्त बात भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने ’जल गंगा संवर्धन अभियान’ अंतर्गत आयोजित ’जल संस्कार-2024’ अंतर्गत ‘‘जल संवर्धन एवं भूमिगत जल पुनर्भरण‘‘ हेतु ग्रामीण क्षेत्र की आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि एक हेक्टेयर भूमि पर ईश्वर हमें 95 लाख लीटर पानी देता है। जिसमें से 65-70 लाख लीटर पानी बहकर खेत और गांव से बहकर बाहर चला जाता है। जिले में गत तीन-चार दशकों में छोटी-बड़ी आवष्यकता के लिए नलकूप खोदना शुरू कर दिया हैं। 1980 तक 35 फीट पर भूमिगत जल उपलब्ध था। आज गिरते-गिरते अब 1000-1200 फीट, कही-कही तो उससे भी ज्यादा गहराई तक भूजल स्तर पहुंच गया है। बुरहानपुर जिले का भूमिगत जलस्तर तेजगति से गिरता जा रहा है। इस गिरते भू-जलस्तर को देखते हुए हम भविष्य की कल्पना कर सकते है कि यह कही त्रासदी न बन जाए। निरंतर गिरते जलस्तर को संभालना शासन, प्रशासन व समाज की जिम्मेदारी है।

संपूर्ण प्रदेश में बुरहानपुर जिले का भूमिगत जल पुर्नभरण स्तर चिंताजनक रूप से सबसे कम है। वर्षा का जल पर्याप्त मात्रा में आने के बाद भी व्यर्थ बहकर चला जा रहा है। यही हमारे जल संकट का सबसे बड़ा कारण है। आप आने वाले वर्षाजल को बचाने के इस ‘‘जल संस्कार अभियान‘‘ में अपना योगदान दें। पेड़, पानी और मिट्टी को सहेजने के इस महती कार्य में अपनी भूमिका हम तय करें-‘‘मैं क्या करूं, हम क्या करें और सब क्या करें।‘‘


पानी परिवार बनाएंगे
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि प्रकृति प्रेमी व ‘‘जल संवर्धन एवं भूमिगत जल पुनर्भरण‘‘ हेतु रूचि रखने वाले नागरिकों को चिन्हित कर ‘‘पानी परिवार‘‘ बनाया जाए। जिला एवं गांव का अलग-अलग पानी परिवार बनाना होगा। हर गांव का वाटर मैप भी बनाना है। इसमें जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों के साथ-साथ शासकीय अधिकारियों को सम्मिलित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बुरहानपुर में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की मंशा के अनुरूप आजादी के अमृत महोत्सव के तहत बुरहानपुर के ग्रामीण क्षेत्र में 104 से अधिक तालाब का निर्माण करवा कर करोड़ों लीटर वर्षाजल संग्रहित किया जा रहा है। इसे अब संभालना भी हमारी जिम्मेदारी है। हम हर तालाब का संत, महात्माओं, महापुरूषों, देवी-देवताओं सहित अपने बच्चों के नाम से तालाबों का नाम रख सकते है और उस तालाब की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले सकते है।


श्रीमती अर्चना चिटनिस ने ग्रामीणों से आग्रह किया कि गांवों में पुरानी जल संरचनाओं के जीर्णाेद्धार करने, नाले-नालियों, डेम, बांध एवं बरसाती नदियों को सूचीबद्ध कर उनके गहरीकरण कर बारिश के जल को सहेजने में अपनी-अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि धरती कहती है हमसे, पानी लेते हो मुझसे। पानी डालो भी मुझमें। पानी से ही समृद्धी है। पानी से सागर, पानी से नदियां, पानी से श्रण, पानी से सदियां। नहीं रहा धरती पर पानी यहां व्यर्थ बेईमानी में, खूब लुटाया हमने-तुमने पानी को नादानी में। पानी है जीवन की आस, पानी को बचाने का करंे प्रयास…इस भाव से हम सभी को आगे आकर अपनी-अपनी जवाबदारियां निभानी होगी।


पानी सदैव से मनुष्य के चिंतन का विषय रहा
कार्यशाला को संबोधित करते हुए विभावरी देवास के जल विशेषज्ञ डॉ.सुनिल चतुर्वेदी ने कहा कि पानी सदैव से मनुष्य के चिंतन का विषय रहा है। आज हम जल संकट के दौर से गुजर रहे हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है कि 2030 में पानी की आवश्यकता आज की तुलना में दुगनी होगी लेकिन उपलब्धता आधी रह जाएगी ऐसे में हमारे सामने भयानक जल संकट होगा। लेकिन इसके उलट हमारे यहाँ पर्याप्त वर्षा होती है और हमारी जरूरत से बहुत ज्यादा पानी वर्षा जल के रूप में प्राप्त होता है। इस पानी को सहेजकर हम जल संकट का सामना कर सकते हैं। बुरहानपुर के किसानों की समृद्धि तभी स्थायी हो सकती है जब वो पानी बचायेंगे।


कार्यशाला के अंत में पानी बचाने के लिए उपस्थितजनों को शपथ दिलाई गई। कार्यशाला को कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल, जिला पंचायत अध्यक्ष गंगाराम मार्काे एवं जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रदीप पाटिल ने भी संबोधित किया। कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल ने कहा कि पानी का काम एक मौसम में करने वाला नहीं है। यह तो 365 दिन करने का काम है। पानी और मिट्टी को संभालना है। तालाब संभालेंगे तो फल, फुल होंगे।
जिला पंचायत अध्यक्ष गंगाराम मार्काे ने कहा कि एक वृक्ष सौ पुत्रों के समान होता है, जो हमें छोटा रहते हुए ऑक्सीजन तो देता है, बड़ा होने पर फल देता है। इसके अलावा वही वृक्ष विशाल आकार लेने के बाद छाया भी देता है। हम केवल पौधे लगाने नहीं वरन् इन पौधों को वृक्ष स्वरूप दिलाने का संकल्प भी ले।


जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रदीप पाटिल ने कहा कि अर्चना दीदी ने बुरहानपुर की चिंता करते हुए यहां की भौगोलिक स्थिति को जाना और समझा। जल संवर्धन को लेकर हमेशा से चिंतित रही है। अर्चना दीदी के प्रयासों से सैकड़ों तालाब और बैराज बनाए गए है। अनेकों स्थानों पर पेड़ लगाए जा रहे है एवं जल संवर्धन की चिंता करते हुए अनेकों तालाब और डेम बनाए जा रहे है। आज की कार्यशाला का उद्देश्य हम पानी की एक-एक बूंद के महत्व को समझे। जल है तो जीवन है और पेड़ है तो कल है। हमें अपने-अपने गांव में कुएं, बावडि़यों, बैराजों सहित जल संरचनाओं को जीवित रखना होगा। इसमें सभी को आगे आकर अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी तभी हम आने वाले बारिश के पानी को ज्यादा से ज्यादा भूमि में डाल सकते है।


कार्यक्रम में कलेक्टर सुश्री भव्या मित्तल, जिला पंचायत अध्यक्ष गंगाराम मार्काे, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ.मनोज माने, उपाध्यक्ष गजानन महाजन, जिला पंचायत सीईओ सुश्री सृष्टि देशमुख, माधव बिहारी अग्रवाल, जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रदीप पाटिल, जनपद पंचायत सीईओ दुर्गेश भुमरकर, शाहपुर नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि वीरेन्द्र तिवारी, जिला पंचायत सदस्य किशोर पाटिल, दिलीप पवार, श्रीमती कविता सूर्यवंशी, अनिल राठौर, शांताराम चौधरी, विनोद चौकसे, प्रकाश महाजन, राजेन्द्र यादव, विनोद कोली, देवानंद पाटिल, फिरोज तड़वी, देवीदास महाजन, दिवाकर सपकाले, सुभानसिंह चौहान, दत्तू शंकर महाजन, विजय पवार, स्वर्णसिंह बर्ने, दीपक महाजन, रूपेश लिहनकर, नितीन महाजन, गणेश महाजन, अमोल पाटिल, किरण पाटिल, केशव चुन्नीलाल, नानसिंग, सरपंच कनिराम, बलिराम राठौर सहित अन्य गणमान्य ग्रामीणजन व प्रकृति प्रेमी उपस्थित रहे।

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